श्री अनंत महिमा अनंत को वरनि सके कवि - नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (22)

श्री अनंत महिमा अनंत को वरनि सके कवि - नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (22)

श्री अनंत महिमा अनंत, को वरनि सके कवि।
संकर्षन सो कछुक कही, श्रीमुख जाकी छवि॥

- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (22)

श्री धाम वृन्दावन एवं इसकी महिमा अनंत एवं अपार है, जिसका पूर्ण निरूपण किसी भी रसिक कवि की सामर्थ्य से परे है। श्री नंददास जी के अनुसार, इस परम पावन धाम के महात्म्य का किंचित वर्णन स्वयं पूर्णतम पुरुषोत्तम श्री कृष्ण ने श्री बलराम जी के समक्ष अपने श्रीमुख से किया है।