ब्रजमण्डल वृंदावन मैं फिरी, सफल किए नहिं पाय ।
तौ नरतन पाय कै मूरख, यौं ही दियौ गँवाय॥
- श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (24)
यदि ब्रजमण्डल एवं वृंदावन में भ्रमण कर भी अपना जीवन सफल न बनाया, तो मानो यह दुर्लभ मानव-जीवन पाकर भी मूर्खता-वश नष्ट कर दिया।
तौ नरतन पाय कै मूरख, यौं ही दियौ गँवाय॥
- श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (24)
यदि ब्रजमण्डल एवं वृंदावन में भ्रमण कर भी अपना जीवन सफल न बनाया, तो मानो यह दुर्लभ मानव-जीवन पाकर भी मूर्खता-वश नष्ट कर दिया।

