(राग आसावरी)
श्याम सों नेह कबहु न कीजै ।
मन श्याम तन श्याम श्याम ही सलोने टेढ़ी प्रीति करै तन छीजै ।। [1]
श्याम पाग सिर छबिसों साँवरे की आली सर्वस अपनो दीजै।
चतुर्भुज प्रभु गिरधर सों हिलमिल अधर सुधा रस पीजै ।। [2]
- श्री चतुर्भुज दास
श्याम सुंदर से कभी नेह मत करना क्यूँकि उनका मन और शरीर दोनों ही काले हैं। वह मन मोहक एवं सलोने हैं, यदि आपने उनसे प्रीति की तो वह तुम्हारा सब कुछ ले लेंगे । [1]
जब वह श्याम वर्ण की पगड़ी धारण करते हैं तो वह उस छवि में इतने सुंदर लगते हैं कि स्वतः ही आप उन पर अपना सब कुछ नयौछावर कर देंगे । श्री चतुर्भुज दास कहते हैं, "अब जाओ श्याम सुंदर से जाकर मिलो और उनके अधरों [होठों] के रस का पान करो"। [2]
श्याम सों नेह कबहु न कीजै ।
मन श्याम तन श्याम श्याम ही सलोने टेढ़ी प्रीति करै तन छीजै ।। [1]
श्याम पाग सिर छबिसों साँवरे की आली सर्वस अपनो दीजै।
चतुर्भुज प्रभु गिरधर सों हिलमिल अधर सुधा रस पीजै ।। [2]
- श्री चतुर्भुज दास
श्याम सुंदर से कभी नेह मत करना क्यूँकि उनका मन और शरीर दोनों ही काले हैं। वह मन मोहक एवं सलोने हैं, यदि आपने उनसे प्रीति की तो वह तुम्हारा सब कुछ ले लेंगे । [1]
जब वह श्याम वर्ण की पगड़ी धारण करते हैं तो वह उस छवि में इतने सुंदर लगते हैं कि स्वतः ही आप उन पर अपना सब कुछ नयौछावर कर देंगे । श्री चतुर्भुज दास कहते हैं, "अब जाओ श्याम सुंदर से जाकर मिलो और उनके अधरों [होठों] के रस का पान करो"। [2]

