लड़ैती अपनाये की लाज - श्री किशोरी अलि

लड़ैती अपनाये की लाज - श्री किशोरी अलि

लड़ैती अपनाये की लाज ।
करुणा करि हे कीरत नंदिनी रसिकन की सिरताज ।। [1]
दीनन की सुधि लेहु स्वामिनी तुम्हीं गरीब निवाज ।
अलि किशोरी ललित लाड़िली देहु वास वनराज ।। [2]

- श्री किशोरी अलि

कीर्ति कुमारी श्री लड़ैती जी [राधा] जो समस्त रसिकों की सिरताज हैं वह अवश्य ही मुझे अपना बना कर मुझपर कृपा बरसाएँगी । [1]

हे स्वामिनी, आप तो गरीब निवाज हैं, कृपा कर इस दीन की भी सुनने लीजिए । श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि हे लाडिली जी ऐसी कृपा करो कि हमें अखंड वृंदावन का वास मिल जाए । [2]