विफलीकृतचंद्रमण्डले राधे पाद - श्री वंशी अली, श्री राधा स्तोत्र (28)

विफलीकृतचंद्रमण्डले राधे पाद - श्री वंशी अली, श्री राधा स्तोत्र (28)

विफलीकृतचंद्रमण्डले राधे पाद नखेन्दुचंद्रिकाभि: ।
करुणा नवधे विधेहि मां विपिनामोद जुषं रसाश्रयम ।।

-  श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (28)

जिनकी पद नख चंद्रिका ने चंद्र मंडल को निस्तेज कर दिया है, ऐसे श्री राधा के चरणों में  करुण क्रंदन युक्त होकर मैं श्री वृंदाविपिन के आमोद और रस के आश्रय की याचना करता हूँ ।