कुंज महल में बैठक राखैं, कुंज महल में केलि ।
गौर श्याम लपटे रहैं, मानौं कनक की बेलि ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (10)
कुंज-महल में ही निवास करो, क्योंकि वहीं श्री श्यामा-श्याम की अनवरत केलि होती रहती है। वहाँ गौर-वर्णा श्री राधा और श्याम-वर्ण श्री कृष्ण एक-दूसरे से इस प्रकार लिपटे रहते हैं, मानो किसी सांवले तमाल के वृक्ष से सोने की कोई सुंदर बेल लिपटी हुई हो।
गौर श्याम लपटे रहैं, मानौं कनक की बेलि ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (10)
कुंज-महल में ही निवास करो, क्योंकि वहीं श्री श्यामा-श्याम की अनवरत केलि होती रहती है। वहाँ गौर-वर्णा श्री राधा और श्याम-वर्ण श्री कृष्ण एक-दूसरे से इस प्रकार लिपटे रहते हैं, मानो किसी सांवले तमाल के वृक्ष से सोने की कोई सुंदर बेल लिपटी हुई हो।

