(राग झंझौटी)
मो सम कौन कुटिल खल बीर ।
सुनि-सुनि कथा युगलवर श्रवणन, बहत प्रवाह न नैनन नीर ।। [1]
नाम रटत मुख श्याम राधिका, पुलकित होत न गात शरीर ।
ललित लड़ैती अति कठोर उर, भाव बैन जिमि लगत न हीर ।। [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (27)
हे मित्र! मेरे समान कुटिल एवं खल कौन होगा जो युगल वर श्री राधा कृष्ण की कथा श्रवण कर नैनों से आंसुओं का प्रवाह भी नहीं बहाता । [1]
जिसके मुख से श्याम राधिका का नाम जप करते हुए शरीर पुलकित नहीं होता ! श्री ललित लड़ैती जी नम्रता पूर्वक कहते हैं कि मेरा हृदय तो अति कठोर है जिसका यही प्रमाण है, और बिना भक्ति भाव भक्ति की सिद्धता कैसे प्राप्त होगी ? [2]
मो सम कौन कुटिल खल बीर ।
सुनि-सुनि कथा युगलवर श्रवणन, बहत प्रवाह न नैनन नीर ।। [1]
नाम रटत मुख श्याम राधिका, पुलकित होत न गात शरीर ।
ललित लड़ैती अति कठोर उर, भाव बैन जिमि लगत न हीर ।। [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (27)
हे मित्र! मेरे समान कुटिल एवं खल कौन होगा जो युगल वर श्री राधा कृष्ण की कथा श्रवण कर नैनों से आंसुओं का प्रवाह भी नहीं बहाता । [1]
जिसके मुख से श्याम राधिका का नाम जप करते हुए शरीर पुलकित नहीं होता ! श्री ललित लड़ैती जी नम्रता पूर्वक कहते हैं कि मेरा हृदय तो अति कठोर है जिसका यही प्रमाण है, और बिना भक्ति भाव भक्ति की सिद्धता कैसे प्राप्त होगी ? [2]

