जोग जप तीर्थ ब्रत संजम - श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

जोग जप तीर्थ ब्रत संजम - श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

जोग जप तीर्थ ब्रत संजम, इनकौ नैंकु न साधौं ।
दुर्लभ सुलभ वास वृन्दावन, राधा पद आराधौं ॥

- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

मैं योग, जप, तीर्थ, व्रत, संयम इत्यादि की साधना एक क्षण के लिए भी नहीं करता; मैं तो केवल श्री राधा के चरणों की अनन्य उपासना करता हूँ, जिनकी कृपा से श्री वृंदावन का दुर्लभ वास भी सुलभ हो जाता है।