प्रीति रीति जान्यौ चहै, तो चातक सों सीख - ब्रज के दोहे

प्रीति रीति जान्यौ चहै, तो चातक सों सीख - ब्रज के दोहे

प्रीति रीति जान्यौ चहै, तो चातक सों सीख।
स्वाँति सलिल सोउ जलद पै, माँगे अनत न भीख॥ [1]

तैसेहि जो जन जगत सों, चाहै निज उद्धार।
तजि राधा काऊ देव पै, मती निज हाथ पसार॥ [2]

- ब्रज के दोहे

यदि प्रीति की रीति जानने की इच्छा हो, तो चातक पक्षी से सीखो, जो स्वाति-बूँद के अतिरिक्त मरना स्वीकार करता है, परंतु और कुछ भी ग्रहण नहीं करता और यहाँ-वहाँ भीख नहीं माँगता। [1]

इसी तरह यदि अपना उद्धार इस जगत में करना चाहते हो, तो श्री राधा की अनन्य भक्ति करो और उनको त्यागकर अन्य किसी देव के आगे अपने हाथ मत पसारो। [2]