जा पर तू अनुकूल किशोरी - श्री प्रेमदास जी

जा पर तू अनुकूल किशोरी - श्री प्रेमदास जी

(सवैया)
जा पर तू अनुकूल किशोरी, ता पर माया कहा करेगी। [1]
जदपि ये बलवान बहुतसी, तदपि है यह पाँय परेगी॥ [2]
यह ठगिनी कादर ही जीतत, सूरन सों यह कहा लरेगी। [3]
प्रेम सखी मूएन को मारत, जीतन के डर आप डरेगी॥ [4]

- श्री प्रेमदासजी [श्री लाल बलबीर जी के भ्राता]

जिसकी तरफ़ साक्षात श्री कृष्ण की स्वामिनी, श्री राधा महारानी होती हैं, उसका माया क्या बिगाड़ सकती है? [1]

यद्यपि यह माया अत्यंत बलवान है, फिर भी श्री राधा महारानी की कृपा से यह हमारे चरणों में झुक जाएगी। [2]

यह ठगिनी कातर जीवों को ही जीतती है, पर जो श्री राधा की अनन्य शरण में हैं उन शूरवीरों से यह क्या लड़ेगी? [3]

श्री प्रेम सखी कहती हैं—यह माया उन्हीं को सताती है जो श्री राधा की शरण नहीं लेते, पर जो जीव उनकी अनन्य शरणागत में जाते हैं उनसे यह भयभीत होकर भाग जाती है। [4]