अलबेली राधा जहां, झमकि धरति है पाय ।
रसिक सिरोमनि श्याम तहँ, देत सु कुसुम बिछाय ।।
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (66)
अलबेली सरकार श्री राधिका जहाँ-जहाँ चरण रखती हैं, रसिक-शिरोमणि श्री श्यामसुंदर वहाँ-वहाँ उनके लिए पुष्प बिछाते हैं।
रसिक सिरोमनि श्याम तहँ, देत सु कुसुम बिछाय ।।
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (66)
अलबेली सरकार श्री राधिका जहाँ-जहाँ चरण रखती हैं, रसिक-शिरोमणि श्री श्यामसुंदर वहाँ-वहाँ उनके लिए पुष्प बिछाते हैं।

