तट-भुवि कृत-कान्तिः श्यामला यास् तटिन्याः
स्फुटित-नव-कदम्बालम्बि-कूजद्-द्विरेफा ।
निरवधि-मधुरिम्णा मण्डितेयं कथं मे
मनसि कम् अपि भावं कानन-श्रीस् तनोति ॥
- श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.243)
यमुना के तट पर स्थित होने से ब्रज मंडल के वनों की शोभा और भी बढ़ जाती है, जहाँ भिनभिनाती मधुमक्षिकायें अनंत मधुरता से अलंकृत नव कदम्ब के वृक्षों का आश्रय लेती हैं जो मेरे मन में एक दिव्य भाव उत्पन्न करती है।
स्फुटित-नव-कदम्बालम्बि-कूजद्-द्विरेफा ।
निरवधि-मधुरिम्णा मण्डितेयं कथं मे
मनसि कम् अपि भावं कानन-श्रीस् तनोति ॥
- श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.243)
यमुना के तट पर स्थित होने से ब्रज मंडल के वनों की शोभा और भी बढ़ जाती है, जहाँ भिनभिनाती मधुमक्षिकायें अनंत मधुरता से अलंकृत नव कदम्ब के वृक्षों का आश्रय लेती हैं जो मेरे मन में एक दिव्य भाव उत्पन्न करती है।

