हमारी प्रान-जीवन-धन श्यामा ।
ब्रज-जन-तरुनि-चक्र-चूड़ामनि पूरनि हरि-मन-कामा ॥ [1]
अति अभिरामा सव सुख-धामा हरि-वामा भनि-दामा ।
‘हरीचंद' तजि साधन सवरे रटत एक तुव नामा ॥ [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (89)
हमारे जीवन का प्रान धन श्री राधा हैं जो समस्त व्रज की नव युवती गण में चूड़ामनि हैं एवं भगवान हरि को पूर्ण रूप से मोहित करने वाली हैं । [1]
श्री राधा अति अभिरामिनी [सुंदर] हैं, समस्त सुखों की धाम हैं, श्री हरि की प्रियतमा हैं एवं भनिदाम हैं । श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र कहते हैं कि मैंने तो समस्त प्रकार की साधनाओं का सर्वथा त्याग कर बस एक श्री राधा के नाम को ही हृदय से स्वीकार किया है । [2]
ब्रज-जन-तरुनि-चक्र-चूड़ामनि पूरनि हरि-मन-कामा ॥ [1]
अति अभिरामा सव सुख-धामा हरि-वामा भनि-दामा ।
‘हरीचंद' तजि साधन सवरे रटत एक तुव नामा ॥ [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (89)
हमारे जीवन का प्रान धन श्री राधा हैं जो समस्त व्रज की नव युवती गण में चूड़ामनि हैं एवं भगवान हरि को पूर्ण रूप से मोहित करने वाली हैं । [1]
श्री राधा अति अभिरामिनी [सुंदर] हैं, समस्त सुखों की धाम हैं, श्री हरि की प्रियतमा हैं एवं भनिदाम हैं । श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र कहते हैं कि मैंने तो समस्त प्रकार की साधनाओं का सर्वथा त्याग कर बस एक श्री राधा के नाम को ही हृदय से स्वीकार किया है । [2]

