त्रैलोक्यपावनीं राधां सन्तो सेवन्त नित्यश - नारद पंचरात्र (2.6.11)

त्रैलोक्यपावनीं राधां सन्तो सेवन्त नित्यश - नारद पंचरात्र (2.6.11)

त्रैलोक्यपावनीं राधां सन्तो सेवन्त नित्यशः ।
यत्पादपद्मे  भक्त्यार्घ्य्म नित्यं कृष्णो ददाति च ।।

- नारद पंचरात्र (2.6.11)
 
संत जन श्री राधा की नित्य भक्ति करते हैं जो तीनों लोकों के जीवों का उद्धार करती हैं । श्री कृष्ण भी हर क्षण श्रीराधा के चरण कमलों में भक्ति के साथ अर्चना करते हैं।