प्यारी झूलन पधारो झुकि आये बदरा ।
साजो सकल श्रिंगार सारो नैनन कजरा ॥ [1]
ऐसो मान न कीजै हठ छोड़िये अली ।
तू तो परम सयानी वृषभान की लली ॥ [2]
तेरो रसिक प्रीतम जोवत मग खड़े ।
सो तो दोऊ कर जोरे तेरे चरण परे ॥ [3]
- श्री हरिराय जी
एक सखी श्री राधा से कहती है कि हे प्यारी ! झूला झूलने पधारो, देखो घने बादल भी आगाए । जब आप समस्त श्रृंगार से अलंकृत होती हैं एवं नैनों में काजल लगाती हैं तो अत्यंत सुंदर दिखती हैं [1]
प्यारी, ऐसे मान मत कीजिए । हे अलि [सखी], अपना हठ त्याग दीजिए, आप तो परम सयानी श्री वृषभानु लली हैं ! [2]
हे प्यारी, तेरे प्रियतम रसिक श्यामसुंदर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं, वो दोनों हाथों को जोड़ तुम्हारे चरणों में पड़े हुए हैं । [3]
साजो सकल श्रिंगार सारो नैनन कजरा ॥ [1]
ऐसो मान न कीजै हठ छोड़िये अली ।
तू तो परम सयानी वृषभान की लली ॥ [2]
तेरो रसिक प्रीतम जोवत मग खड़े ।
सो तो दोऊ कर जोरे तेरे चरण परे ॥ [3]
- श्री हरिराय जी
एक सखी श्री राधा से कहती है कि हे प्यारी ! झूला झूलने पधारो, देखो घने बादल भी आगाए । जब आप समस्त श्रृंगार से अलंकृत होती हैं एवं नैनों में काजल लगाती हैं तो अत्यंत सुंदर दिखती हैं [1]
प्यारी, ऐसे मान मत कीजिए । हे अलि [सखी], अपना हठ त्याग दीजिए, आप तो परम सयानी श्री वृषभानु लली हैं ! [2]
हे प्यारी, तेरे प्रियतम रसिक श्यामसुंदर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं, वो दोनों हाथों को जोड़ तुम्हारे चरणों में पड़े हुए हैं । [3]

