जै जै श्री रासेश्वरी, बिनै सुनौ चित लाय ।
क़छु छवि बरनन चहत हौं, कीजै आप सहाय॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शिख नख वर्णन (15)
रास की अधिष्ठात्री श्री रासेश्वरी (श्री राधा) की बारंबार जय हो! हे स्वामिनी! आप चित्त लगाकर मेरी इस लघु विनय को सुनिए। मैं आपकी उस अनुपम छवि का किंचित वर्णन करना चाहता हूँ; कृपा करके आप स्वयं मेरी सहायता कीजिए।
क़छु छवि बरनन चहत हौं, कीजै आप सहाय॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शिख नख वर्णन (15)
रास की अधिष्ठात्री श्री रासेश्वरी (श्री राधा) की बारंबार जय हो! हे स्वामिनी! आप चित्त लगाकर मेरी इस लघु विनय को सुनिए। मैं आपकी उस अनुपम छवि का किंचित वर्णन करना चाहता हूँ; कृपा करके आप स्वयं मेरी सहायता कीजिए।

