मनेर स्मरण प्राण - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (61)

मनेर स्मरण प्राण - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (61)

मनेर स्मरण प्राण, मधुर मधुर धाम, युगल-विलास श्रुति सार ।
साध्य साधन एई, इहा वइ आर नाइ, एइ तत्व सर्वविधिसार ।।

- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (61)

मन से स्मरण करना ही प्राण है । अत: मधुराति मधुर रस धाम श्री युगल विलास का स्मरण करना चाहिए क्यूँकि यही सर्व श्रुतियों का सार है । इनका स्मरण करना ही साधन एवं साध्य है, इन्हें छोड़कर अन्य कोई साधन साध्य नहीं है और समस्त उपासनाओं का सार भी युगल विलास का स्मरण ही है ।