श्रीवृन्दाबन चिद्घन, कछु छबि वरनि न जाई ।
कृष्ण ललित लीला के काज, गहि रह्यो जड़ताई॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (17)
श्री वृन्दावन साक्षात् 'चिद्घन' (परम चेतना का घनीभूत स्वरूप) है, जिसकी दिव्य छवि का वर्णन करना वाणी से परे है। श्री कृष्ण की सुंदर और सुकुमार ललित लीलाओं के संपादन हेतु ही इस दिव्य चिन्मय धाम ने लोक-दृष्टि में जड़ता धारण कर रखी है।
कृष्ण ललित लीला के काज, गहि रह्यो जड़ताई॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (17)
श्री वृन्दावन साक्षात् 'चिद्घन' (परम चेतना का घनीभूत स्वरूप) है, जिसकी दिव्य छवि का वर्णन करना वाणी से परे है। श्री कृष्ण की सुंदर और सुकुमार ललित लीलाओं के संपादन हेतु ही इस दिव्य चिन्मय धाम ने लोक-दृष्टि में जड़ता धारण कर रखी है।

