जिन देह दई वर मानुस की - ब्रज के सेवैया

जिन देह दई वर मानुस की - ब्रज के सेवैया

जिन देह दई वर मानुस की, धन धाम हितू परिवार है रे।
ब्रजधाम भलौ रहिवे कूँ दियो, निज सेवादई सुखसार है रे॥ [1]
घर - बाहर संग सदा लौं रहै, फिर तोहि कछू ना विचार है रे।
ऐसे श्री बॉके बिहारी जी कूँ, मन भूल गयो धिक्कार है रे॥ [2]

- ब्रज के सेवैया

जिसने तुझे यह मानव देह दिया, धन-ऐश्वर्य और परिवार का सुख प्रदान किया, ब्रजधाम में निवास का सौभाग्य दिया और अपनी परम-आनंदमयी सेवा का अवसर भी दिया। [1]

जो घर में और बाहर हर क्षण तेरे साथ है, जिसके रहते तुझे किसी और की चिंता नहीं नहीं होती। हे मन! ऐसे कृपालु श्री बाँके बिहारी, जो हर प्रकार से कृपा बरसाते हैं, उन्हें तू भूल गया—तुझ पर धिक्कार है। [2]