राशब्दोच्चारणादेव स्फीतो भवति माधवः  - ब्रह्म वैवर्त पुराण (4.52.38)

राशब्दोच्चारणादेव स्फीतो भवति माधवः - ब्रह्म वैवर्त पुराण (4.52.38)

राशब्दोच्चारणादेव स्फीतो भवति माधवः ।
धाशब्दोच्चारतः पश्चाद्धावत्येव ससंभ्रमः ।।

- ब्रह्मवैवर्तपुराण -4.52.38 (खण्डः 4 [श्रीकृष्णजन्मखण्डः]/अध्यायः 52 / छंद 38)
 
राधा नाम की महिमा इस प्रकार है: जब कोई व्यक्ति 'रा' का उच्चारण करता है तब श्री कृष्ण का रोम रोम हर्ष से प्रफुल्लित होजाता है, पुनः 'धा' का उच्चारण होते ही वह बड़े सत्कार के साथ उसके पीछे-पीछे दौड़ने लगते हैं।