नारायण प्रीतम निकट, सोई पहुँचनहार ।
गेंद बनावै सीस की, खेलै बीच बजार ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (133)
नारायण स्वामी जी कहते हैं कि अपने प्रियतम (श्यामसुंदर) के निकट केवल वही पहुँच सकता है, जो अपने अहंकार और मोह रूपी शीश का त्याग कर दे। जो अपने सिर को खेल की गेंद बनाकर संसार रूपी बाजार के बीच निर्भय होकर प्रेम का खेल खेलता है, वही उस परम पद को प्राप्त करने का अधिकारी है।
गेंद बनावै सीस की, खेलै बीच बजार ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (133)
नारायण स्वामी जी कहते हैं कि अपने प्रियतम (श्यामसुंदर) के निकट केवल वही पहुँच सकता है, जो अपने अहंकार और मोह रूपी शीश का त्याग कर दे। जो अपने सिर को खेल की गेंद बनाकर संसार रूपी बाजार के बीच निर्भय होकर प्रेम का खेल खेलता है, वही उस परम पद को प्राप्त करने का अधिकारी है।

