किशोरी मोहे कब अपनावोगी - श्री किशोरी अलि

किशोरी मोहे कब अपनावोगी - श्री किशोरी अलि

(राग पीलू)
किशोरी मोहे कब अपनावोगी ।
निज कर कमल धर मस्तक पर
श्री वृन्दावन बसावोगी ॥[1]
सुन्दर रूप स्वरूप आपनो
कबते मोहि दिखावोगी।
'अलिकिशोरी' नाम साँचो कर
रसिकन माँय मिलावोगी ॥ [2]

-  श्री किशोरी अलि

हे किशोरी जी, मुझे आप कब अपनाओगी ? कब आप अपने कमल हस्त को मेरे मस्तक पर रख कर मुझे वृंदावन का वास प्रदान करोगी । [1]

कब आप अपना सुंदर स्वरूप मुझे इन नैनों द्वारा दिखलाओगी ? श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि मेरे नाम [जिसका अर्थ श्री किशोरी जी की सखी है] को सत्य कर मुझे अन्य रसिक सखियों में कब शामिल करोगी ? [2]