तुम्हीं जीवनी प्रान मम, तुम्हीं जान सुजान ।
अहो बिहारिनी लाडिली, मेरें गति नहिं जान॥
- श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विलास (4)
हे लाडिली श्री बिहारिनी जू! आप ही मेरे प्राणों का आधार (जीवन) हैं और आप ही मेरी अंतर्यामी सुजान स्वामिनी हैं। हे प्रिया जी! आपके अतिरिक्त मेरी और कोई गति (आश्रय या मार्ग) नहीं है, यह मैं भली-भांति जानता हूँ।
अहो बिहारिनी लाडिली, मेरें गति नहिं जान॥
- श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विलास (4)
हे लाडिली श्री बिहारिनी जू! आप ही मेरे प्राणों का आधार (जीवन) हैं और आप ही मेरी अंतर्यामी सुजान स्वामिनी हैं। हे प्रिया जी! आपके अतिरिक्त मेरी और कोई गति (आश्रय या मार्ग) नहीं है, यह मैं भली-भांति जानता हूँ।

