पुण्य का प्रताप उदय होता कई जन्मों का - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (36)

पुण्य का प्रताप उदय होता कई जन्मों का - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (36)

पुण्य का प्रताप उदय होता कई जन्मों का,
एक बार ब्रज में मनुष्य जब आता है। [1]
सेवाकुंज, वंशीवट, कालीदह देख देख,
सुखद अतीत सुधा- सिन्धु में समाता है॥ [2]
कामना न और किसी बात की रहती उसे,
सुरपुर के यान यों कहके फिराता है। [3]
ऐहो देवदूतो ! क्यों विमान यहां लाये तुम,
वृन्दावन वास छोड़ स्वर्ग कौन जाता है ? [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (36)

अनेक जन्मों के पुण्य का फल तब प्राप्त होता है जब किसी मनुष्य को एक बार ब्रज में आने का अवसर मिलता है। [1]

सेवाकुंज, वंशीवट, कालीदह आदि को देख-देखकर मन में अनिर्वचनीय आनंद होता है, और जीव रस के समुद्र में डूबने लगता है जब श्री राधा-कृष्ण की लीलाओं का चिंतन बनता है। [2]

ब्रज में आने के बाद कोई और कामना शेष नहीं रहती और स्वर्ग आदि की भी इच्छा समाप्त हो जाती है। [3]

डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती जी कहते हैं कि "हे देवदूतों, तुम स्वर्ग के लिए विमान क्यों लाए हो? भला वृंदावन वास को छोड़कर स्वर्ग कौन मूर्ख जाना चाहेगा?" [4]