हमारी नित इष्ट राधिका रानी - श्री हित वृंदावन दास जी

हमारी नित इष्ट राधिका रानी - श्री हित वृंदावन दास जी

हमारी नित इष्ट राधिका रानी ।
जाके प्रेम पगे नन्दनन्दन
बिहरत संग रुचि मानी ॥  [1]
वंदत जाहि महामुनि निसिदिन
गावत सुजस कहानी ।
'वृन्दावन’ हित रूप स्वामिनी
आगम निगम बखानी ॥ [2]

- श्री हित वृंदावन दास जी

हमारी नित्य श्री राधा ही केवल इष्ट हैं, जिनके प्रेम में श्री श्याम सुंदर सदा पगे रहते हैं एवं उनकी रुचि मान कर उनके संग नित्य विहार करते हैं । [1]

जिनकी [श्री राधा] वंदना महामुनि जन निशिदिन करते हैं एवं उन्हीं की लीलाओं का गुणगान करते रहते हैं । श्री हित वृंदावन दास [चाचा जी] कहते हैं कि उनकी स्वामिनी श्री राधा हैं जिनका यश वेदों पुराणों ने भी बखान किया है । [2]