राधा नाम अदभुत चंद - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (216)

राधा नाम अदभुत चंद - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (216)

(राग देस)
राधा नाम अदभुत चंद।
वरसत नित शृंगार सुधारस
सरसत अमित अनंद ॥ [1]
जासु प्रभा अंतसतम नासन
जात सकल दुखद्वन्द ।
ललितकिशोरी सदायेकरस
क्यों न भजसि मतिमंद ॥ [2]

- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (216)

हमारा संपूर्ण नाता श्री राधा नाम से ही है जिसके लेने से श्री श्याम सुंदर के प्रति प्रगाढ़ प्रीति उत्पन्न हो जाती है । [1]

श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि यदि  ऐसा विश्वास हृदय में पहले हो गया होता तो अब तक जन्म जन्म का भ्रमण खत्म हो जाता एवं निकुंजों में निवास हो गया होता । [2]