(राग पीलू)
किशोरी सुन्दरी श्यामा तू ही सरकार मेरी है ।
नहीं है और से मतलब फकत एक आस तेरी है ।। [1]
छबीली स्वामिनी श्यामा मुझे बिरहा ने घेरी है।
दर्श दीजे कृपा करो काहे कूँ करी देरी है ।। [2]
टहल बक्सो महल निजकी विनय करजोर मेरी है ।
'सरस' यह माधुरी दासी तेरे चरणों की चेरी है ।। [3]
- श्री सरस माधुरी जी
हे किशोरी श्री राधा, हे सुंदरी श्यामा, तुम ही एक मात्र मेरी सरकार हो । मुझे अन्य किसी से कोई मतलब नहीं है, केवल एक तुम्हारी ही मुझे आस है । [1]
हे छबीली स्वामिनी, तुम्हारे वियोग में मुझे विरह ने घेर लिया है, मुझे दर्शन देकर मुझे कृतार्थ करिए, अब किस बात की देरी कर रही हो ? [2]
मेरी हाथ जोड़ कर यही विनती है कि मुझे अपने निज महल की टहल प्रदान करिए । श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि मैं तो तुम्हारे चरणों की दासी हूँ । [3]
किशोरी सुन्दरी श्यामा तू ही सरकार मेरी है ।
नहीं है और से मतलब फकत एक आस तेरी है ।। [1]
छबीली स्वामिनी श्यामा मुझे बिरहा ने घेरी है।
दर्श दीजे कृपा करो काहे कूँ करी देरी है ।। [2]
टहल बक्सो महल निजकी विनय करजोर मेरी है ।
'सरस' यह माधुरी दासी तेरे चरणों की चेरी है ।। [3]
- श्री सरस माधुरी जी
हे किशोरी श्री राधा, हे सुंदरी श्यामा, तुम ही एक मात्र मेरी सरकार हो । मुझे अन्य किसी से कोई मतलब नहीं है, केवल एक तुम्हारी ही मुझे आस है । [1]
हे छबीली स्वामिनी, तुम्हारे वियोग में मुझे विरह ने घेर लिया है, मुझे दर्शन देकर मुझे कृतार्थ करिए, अब किस बात की देरी कर रही हो ? [2]
मेरी हाथ जोड़ कर यही विनती है कि मुझे अपने निज महल की टहल प्रदान करिए । श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि मैं तो तुम्हारे चरणों की दासी हूँ । [3]

