बेगम अगम निगम कहैं, सुगम लाडिली लाल ।
नित्य अनंत अनादि के, भगवत रसिक दलाल ॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकाभरण ग्रंथ 7 (7)
वेद जिस परम तत्व को अगम और दुर्लभ बताते हैं, वही तत्व श्री लाड़िली लाल की दिव्य जोड़ी के रूप में रसिकों को सहज सुलभ है। इतना ही नहीं, रसिक जन ऐसे दलाल के समान हैं, जो अन्य जनों को भी इस प्रेम-जोड़ी की प्राप्ति करा सकते हैं।
नित्य अनंत अनादि के, भगवत रसिक दलाल ॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकाभरण ग्रंथ 7 (7)
वेद जिस परम तत्व को अगम और दुर्लभ बताते हैं, वही तत्व श्री लाड़िली लाल की दिव्य जोड़ी के रूप में रसिकों को सहज सुलभ है। इतना ही नहीं, रसिक जन ऐसे दलाल के समान हैं, जो अन्य जनों को भी इस प्रेम-जोड़ी की प्राप्ति करा सकते हैं।

