तें रहीम मन आपुनो, कीनहौं चारु चकोर।
निसि वासर लागो रहै, कृष्ण चंद्र की ओर॥
- श्री रहीम दास, रहिमन विलास, दोहावली, मंगलाचरण (1)
अपने मन को एक चकोर पक्षी बना लो, जो रात-दिन केवल श्रीकृष्ण-रूपी चंद्रमा की ओर ही एकटक निहारता रहे और उन्हीं के स्वरूप-दर्शन की प्यास में मग्न रहे।
निसि वासर लागो रहै, कृष्ण चंद्र की ओर॥
- श्री रहीम दास, रहिमन विलास, दोहावली, मंगलाचरण (1)
अपने मन को एक चकोर पक्षी बना लो, जो रात-दिन केवल श्रीकृष्ण-रूपी चंद्रमा की ओर ही एकटक निहारता रहे और उन्हीं के स्वरूप-दर्शन की प्यास में मग्न रहे।

