कुंज बिहारी हो लाल दरसन दीजौ साँवरे ।
थारे गुनरूप निहार सफल करैं दृग भांवरे ।। [1]
ललित त्रिभंगी हो लाल लटकत-लटकत आइयौ ।
रंग महल री हो वाट जय श्री लाल रूप दरसाईयौ ।। [2]
- श्री हित रूपलाल जी
हे कुंजबिहारी लाल, मुझे अपना दर्शन प्रदान करो साँवरे । ऐसी कृपा हो कि मेरे दृग तुम्हारे गुणरूप को निहार कर सफल हो जाएँ । [1]
अपने ललित त्रिभंगी रूप में तुम झूमते झूमते आओ । श्री हित रूप लाल जी कहते हैं, "हे बाँके बिहारी, जब आप रंग महल में जा रहे हों, तो कृपया मुझे अपने सुंदर दर्शन देना"। [2]
थारे गुनरूप निहार सफल करैं दृग भांवरे ।। [1]
ललित त्रिभंगी हो लाल लटकत-लटकत आइयौ ।
रंग महल री हो वाट जय श्री लाल रूप दरसाईयौ ।। [2]
- श्री हित रूपलाल जी
हे कुंजबिहारी लाल, मुझे अपना दर्शन प्रदान करो साँवरे । ऐसी कृपा हो कि मेरे दृग तुम्हारे गुणरूप को निहार कर सफल हो जाएँ । [1]
अपने ललित त्रिभंगी रूप में तुम झूमते झूमते आओ । श्री हित रूप लाल जी कहते हैं, "हे बाँके बिहारी, जब आप रंग महल में जा रहे हों, तो कृपया मुझे अपने सुंदर दर्शन देना"। [2]

