भूल छुड़ावो लाड़िली, समझ देउ भर-पूरि - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (156)

भूल छुड़ावो लाड़िली, समझ देउ भर-पूरि - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (156)

भूल छुड़ावो लाड़िली, समझ देउ भर-पूरि।
यह बात तुम्हारे हाथ है, मेरी जीवन-मूरि ॥

- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (156)

हे लाड़िली! मेरी समस्त भूलों और अज्ञानता को दूर कर मुझे पूर्ण विवेक प्रदान कीजिए। हे मेरी प्राण-रसायन श्री किशोरीजी, यह कार्य केवल आपके ही हाथ में है और आपके लिए अत्यंत सहज है; आपके अतिरिक्त कोई भी इसे नहीं कर सकता।