या ब्रज स्याम सघन घन उनये - श्री हित चित जी

या ब्रज स्याम सघन घन उनये - श्री हित चित जी

या ब्रज स्याम सघन घन उनये ।
चपला चमकि-चमकि उर लावत प्रीतम प्रेम नये ॥ [1]
कुहुकन मोर पपीहा पियु-पियु मदन बिलास दये ।
जै श्रीहित चित रूप तृभंगी रंगी रंगिनि मोल लये ॥ [2]

- श्री हित चित जी

आज ब्रज में काले बादल छा गए हैं। बिजली के बार बार चमकने के कारण हृदय में प्रेम की नित्य नई लहरें उठ रही हैं। [1]

मोर और पपीहा पक्षी मधुर स्वर में गा कर मदन का विलास कर रहे हैं। श्री हित चित जी कहते हैं, "श्याम सुंदर के त्रिभंगी रूप ने श्री राधिका प्यारी के हृदय को मोहित कर लिया है।" [2]