कृपा करैं ब्रजनाथ जौ - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (7)

कृपा करैं ब्रजनाथ जौ - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (7)

कृपा करैं ब्रजनाथ जौ, ब्रजदरसन कै नैंन ।
या ब्रजबन की माधुरी, तौ परसै उर-एन ॥

- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (7)
 

यदि ब्रजनाथ कृपा करें, तभी ब्रज के दर्शन इन नैनों से कोई कर सकता है, और तभी ब्रज की माधुरी हृदय को स्पर्श कर सकती है, अन्यथा नहीं।