दैवदोपेण महता ये च निन्दन्ति राधिकाम् - नारद पंचरात्र (2.6.8)

दैवदोपेण महता ये च निन्दन्ति राधिकाम् - नारद पंचरात्र (2.6.8)

दैवदोपेण महता ये च निन्दन्ति राधिकाम् ।
वामाचाराश्च मूर्खाश्च पापिनश्च हरिद्विषः ॥

- नारद पंचरात्र (2.6.8)

यदि कोई दैवदोष (पूर्वकर्मों) से कोई श्री राधिका की निन्दा करता है तो वह वाममार्गी, मूर्ख, पापी तथा साक्षात श्री हरि का द्वेषी है।