हों तौ चेरौ चरन कौ, चरणहि नाऊँ माथ।
जिन चरणन की वन्दना, करी द्वारिका नाथ॥
- ब्रज के दोहे
जिन श्रीचरणों की वंदना स्वयं द्वारिकानाथ श्रीकृष्ण करते हैं, मैं केवल उन्हीं श्रीराधा के चरणों की दासी हूँ और उन्हीं श्री चरणों को अपने मस्तक से लगाती हूँ।
जिन चरणन की वन्दना, करी द्वारिका नाथ॥
- ब्रज के दोहे
जिन श्रीचरणों की वंदना स्वयं द्वारिकानाथ श्रीकृष्ण करते हैं, मैं केवल उन्हीं श्रीराधा के चरणों की दासी हूँ और उन्हीं श्री चरणों को अपने मस्तक से लगाती हूँ।

