कपट गाँठि मन में नहीं, सबसों सरल सुभाव - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (96)

कपट गाँठि मन में नहीं, सबसों सरल सुभाव - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (96)

कपट गाँठि मन में नहीं, सबसों सरल सुभाव ।
नारायण ता भक्तकी, लगी किनारे नाँव॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (96)

जिस जीव के मन में कपट नहीं है और जो सबके प्रति सरल स्वभाव रखता है, उसी भक्त की नैया पार लगती है; वही भगवद्प्राप्ति का अधिकारी बनता है।