सदा सनातन एक रस, सदा बसत सब काल ।
श्रीराधा रानी जहाँ, राजा मोहन लाल ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी , सहज सुख (31)
हम श्री वृन्दावन की महिमा का क्या वर्णन करें, जहाँ के राजा मोहन लाल और रानी श्री राधा सी हैं। ये अनादि काल से यहाँ सब काल, अर्थात् सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग आदि सभी कालों में स्थायी रूप से विराजमान रहते हैं और जिनका स्नेह एकरस है।
श्रीराधा रानी जहाँ, राजा मोहन लाल ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी , सहज सुख (31)
हम श्री वृन्दावन की महिमा का क्या वर्णन करें, जहाँ के राजा मोहन लाल और रानी श्री राधा सी हैं। ये अनादि काल से यहाँ सब काल, अर्थात् सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग आदि सभी कालों में स्थायी रूप से विराजमान रहते हैं और जिनका स्नेह एकरस है।

