(राग कल्याण एवं राग विहाग)
ललनकी बतियाँ चोज सनी।
परम कृपाल चितै करुनामय, लोचन कोर अनी ।। [1]
उमगि ढरे दोऊ सुरत सेज पै, टूटी तरकि तनी ।
परमउदार व्यासकी स्वामिनि, वकसति मौज घनी ।। [2]
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (273)
श्री लालजी [कृष्ण] श्री राधा से प्रेम भरी बतियाँ कर रहे हैं । परम कृपालु श्री राधिका, करुणामयी दृष्टि से लाल जी की ओर निहार रही हैं । [1]
दोनों सुरत रस में उन्मत्त सेज पर विराजमान हैं एवं उनके वस्त्र भी तन से ढिलक रहे हैं । विशाखा अवतार श्री हरिराम व्यास जी की परम उदार स्वामिनी श्री राधिका आज बहुत प्रसन्न हैं। [2]
ललनकी बतियाँ चोज सनी।
परम कृपाल चितै करुनामय, लोचन कोर अनी ।। [1]
उमगि ढरे दोऊ सुरत सेज पै, टूटी तरकि तनी ।
परमउदार व्यासकी स्वामिनि, वकसति मौज घनी ।। [2]
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (273)
श्री लालजी [कृष्ण] श्री राधा से प्रेम भरी बतियाँ कर रहे हैं । परम कृपालु श्री राधिका, करुणामयी दृष्टि से लाल जी की ओर निहार रही हैं । [1]
दोनों सुरत रस में उन्मत्त सेज पर विराजमान हैं एवं उनके वस्त्र भी तन से ढिलक रहे हैं । विशाखा अवतार श्री हरिराम व्यास जी की परम उदार स्वामिनी श्री राधिका आज बहुत प्रसन्न हैं। [2]

