गुणनि अगाधा राधिका, श्री राधा रस धाम ।
सब सुख साधा पाइए, आधा जाको नाम ॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (36)
श्री राधिका जी अनंत गुणों की अगाध सागर हैं और साक्षात् रस का धाम हैं। संसार के समस्त सुखों की सिद्धि और पूर्णता केवल उनके नाम के 'आधे' भाग (अर्थात् केवल 'रा' शब्द के उच्चारण मात्र) से ही सहज प्राप्त हो जाती है।
सब सुख साधा पाइए, आधा जाको नाम ॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (36)
श्री राधिका जी अनंत गुणों की अगाध सागर हैं और साक्षात् रस का धाम हैं। संसार के समस्त सुखों की सिद्धि और पूर्णता केवल उनके नाम के 'आधे' भाग (अर्थात् केवल 'रा' शब्द के उच्चारण मात्र) से ही सहज प्राप्त हो जाती है।

