(राग अडानो चौताला)
तेरी भौंह की मरौरन तें ललित त्रीभंगी भये
अंजन दे चितयो भये जू स्याम वाम। [1]
तेरी मुसकान देख दामिनी सी कोंध जात
दीन हवे याचत प्यारी लेत राधे आधो नाम॥ [2]
ज्यों-ज्यों नचायो चाहो तैसे हरि नाचत बल
अब तो मया कीजे चलिये निकुंज धाम। [3]
नंददास प्रभु बोलो तो बुलाय लाऊँ
उनको तो कलप बीतें तेरी घरी याम॥ [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (72)
इस पद में श्री राधिका मान करी हुई हैं और उनको मनाने एवं श्याम सुंदर से मिलवाने के लिए श्री नंददास प्रयत्न कर रहे हैं। वे कहते हैं:
हे प्यारी राधिके, तुम्हारी चढ़ी हुई भौंह को देखकर ही श्री लाल जी (श्री कृष्ण) त्रिभंगी मुद्रा में आ जाते हैं और अंजन छुवाने के कारण श्याम कहलाते हैं। [1]
हे राधे, तुम्हारी मुस्कान देखकर श्री कृष्ण के हृदय में बिजली सी कौंध जाती है, और दीन होकर तुम्हारा नाम लेते हुए वे याचना कर रहे हैं। केवल 'रा' कहते ही भावावेश में बह जाते हैं। [2]
तेरी भौंह की मरौरन तें ललित त्रीभंगी भये
अंजन दे चितयो भये जू स्याम वाम। [1]
तेरी मुसकान देख दामिनी सी कोंध जात
दीन हवे याचत प्यारी लेत राधे आधो नाम॥ [2]
ज्यों-ज्यों नचायो चाहो तैसे हरि नाचत बल
अब तो मया कीजे चलिये निकुंज धाम। [3]
नंददास प्रभु बोलो तो बुलाय लाऊँ
उनको तो कलप बीतें तेरी घरी याम॥ [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (72)
इस पद में श्री राधिका मान करी हुई हैं और उनको मनाने एवं श्याम सुंदर से मिलवाने के लिए श्री नंददास प्रयत्न कर रहे हैं। वे कहते हैं:
हे प्यारी राधिके, तुम्हारी चढ़ी हुई भौंह को देखकर ही श्री लाल जी (श्री कृष्ण) त्रिभंगी मुद्रा में आ जाते हैं और अंजन छुवाने के कारण श्याम कहलाते हैं। [1]
हे राधे, तुम्हारी मुस्कान देखकर श्री कृष्ण के हृदय में बिजली सी कौंध जाती है, और दीन होकर तुम्हारा नाम लेते हुए वे याचना कर रहे हैं। केवल 'रा' कहते ही भावावेश में बह जाते हैं। [2]
जैसे-जैसे तुम नचा रही हो, श्याम वैसे-वैसे ही तुम्हारे बल पर नाच रहे हैं। अब उन पर कृपा कीजिए, स्वामिनी, और शीघ्र ही निकुंज में पधारिए। [3]
श्री नंददास जी कहते हैं कि "कहो तो मैं उन्हें बुला लाऊँ। तुम्हारी तो एक-एक घड़ी बीत रही है, पर उनके लिए तुम्हारे बिना एक घड़ी भी कल्पों के समान बीत रही है।" [4]

