जाँचें और न देव कौ, नहीं तीरथ वृत आस - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (61)

जाँचें और न देव कौ, नहीं तीरथ वृत आस - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (61)

जाँचें और न देव कौ, नहीं तीरथ वृत आस ।
महली श्री हरिदास के, चरण कमल विश्वास ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (61)

वृन्दावन के एकांत निकुञ्जों में नित्य-विहार करने वाले श्री बिहारी-बिहारिन के सिवा हमारा न तो किसी अन्य देवता से कोई संबंध है और न किसी तीर्थ-व्रत आदि में कोई आश्रय। हम तो पूर्णतः स्वामी हरिदास जी के महल के आश्रित हैं और उनके चरण-कमलों में ही अपना अटल और अनन्य विश्वास रखते हैं।