कृष्णराधिका कुंड को, ह्वैहों कबहूँ नीर ।
करिहैं केलि कलोल सों, श्यामल गौर शरीर ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (54)
मेरी यह अभिलाषा है कि क्या मैं कभी श्री राधा-कृष्ण के पवित्र कुंडों (श्री राधाकुण्ड और श्री श्यामकुण्ड) का जल बन सकूँगा? जब वे युगल किशोर अपने श्यामल और गौर वर्ण के श्री अंगों से उस जल में जल-क्रीड़ा (केलि-कलोल) करेंगे, तब मुझे उनके स्पर्श का परम सुख प्राप्त होगा।
करिहैं केलि कलोल सों, श्यामल गौर शरीर ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (54)
मेरी यह अभिलाषा है कि क्या मैं कभी श्री राधा-कृष्ण के पवित्र कुंडों (श्री राधाकुण्ड और श्री श्यामकुण्ड) का जल बन सकूँगा? जब वे युगल किशोर अपने श्यामल और गौर वर्ण के श्री अंगों से उस जल में जल-क्रीड़ा (केलि-कलोल) करेंगे, तब मुझे उनके स्पर्श का परम सुख प्राप्त होगा।

