तार भक्तसंगे सदा - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (109)

तार भक्तसंगे सदा - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (109)

तार भक्तसंगे सदा, रसलीला-प्रेम कथा, जे करे से पाय घनश्याम ।
इहाते विमुख जेई, तार कभु सिद्धि नाई, ना शुनिये तार जेन नाम ।।

- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (109)

श्रीराधिका के भक्तों का जो सदा संग करता है, मधुररस लीला की प्रेममयी कथा का जो श्रवण करता है, वह निश्चय ही श्रीघनश्याम को प्राप्त करता है। जो श्रीराधा से विमुख है, उसे तो कभी भजन में सिद्धि नहीं प्राप्त हो सकती, वह प्रेम-भक्ति को कभी प्राप्त नहीं कर सकता। उस व्यक्ति का तो नाम भी नहीं सुनना चाहिए।