राधा बावड़ी - वृन्दावन

राधा बावड़ी - वृन्दावन

श्री राधा बावड़ी को श्री भगवत रसिक देव जी की बावड़ी भी कहते हैं । यहाँ स्वामी हरिदास जी की परंपरा के महान संत श्री भगवत रसिकदेव जी ने भजन किया है । आज भी उनकी भजन कुटी यहाँ विद्यमान है । यह स्थान सुन्दर लताओं से आच्छादित है । अनेक पुष्प एवं फलों के वृक्ष स्थान-स्थान पर लगे हुए हैं । अनेक पक्षियों के कलरव समस्त वातावरण में गुंजायमान रहता है । मोर नित्य ही भ्रमण परायण रहते हैं । सुन्दर रज के दर्शन एवं स्पर्श से मन आनंद से भर जाता है ।
ऐसी मान्यता है की श्री राधारानी यहाँ इस बावड़ी से जल भरा करती थीं और जल क्रीड़ा करती थीं, इसलिए यह बावड़ी राधा बावड़ी के नाम से विख्यात हुआ ।
यह स्वामी श्री हरिदास जी की जन्मस्थली है । स्वामी हरिदास जी यहाँ 25 वर्ष तक विराजमान रहे और उसके पश्चात् निधिवन में विराजे जो यहाँ से 2.5 km की दूरी पर स्थित है, जहाँ उन्होंने श्री बांके बिहारी जी को प्रकट किया । स्वामी हरिदास जी के प्रथम शिष्य रस सागर श्री विट्ठलविपुल देव जी का जन्म भी इसी ग्राम में हुआ था । इसके पश्चात् स्वामी ललित मोहिनिदेव जी के शिष्य श्री स्वामी भगवत रसिक देव जी ने यहाँ भजन किया । उनके गुरुभाई श्री चतुरदास जी ने भी इसी स्थान पर भजन किया था । श्री चतुरदास जी के सेव्य ठाकुर श्री चतुर बिहारी जी यहाँ विराजमान हैं । 
राधा बावड़ी बहुत गहरा है । निचे जाने के लिए सीढियाँ बनी हैं । बावड़ी से सटे अनेक गुफाएं हैं जहाँ संतगण श्री राधारानी के दर्शन एवं उनकी कृपा प्राप्ति के लिए भजन किया करते थे ।
राधा बावड़ी टटिया स्थान की शाखा है ।

स्थान :
राधा बावड़ी राजपुर ग्राम में परिक्रमा मार्ग के निकट श्री वृन्दावन, मथुरा में स्थित है जो बाँके बिहारी मंदिर से 2.5 km की दूरी पर स्थित है ।