सब धर्मनि में भ्रमै जिनि, जुगल चरन चितलाइ ।
जैसे दुःख परदेस कौ, घर आये तें जाइ ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (37)
अन्य समस्त धर्मों की भटकन छोड़कर युगल-चरणों को ही हृदय में धारण करना चाहिए। जैसे परदेश से आए व्यक्ति का दुःख घर आ जाने पर मिट जाता है, वैसे ही जीव परम शांति का अनुभव करता है।
जैसे दुःख परदेस कौ, घर आये तें जाइ ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (37)
अन्य समस्त धर्मों की भटकन छोड़कर युगल-चरणों को ही हृदय में धारण करना चाहिए। जैसे परदेश से आए व्यक्ति का दुःख घर आ जाने पर मिट जाता है, वैसे ही जीव परम शांति का अनुभव करता है।

