मोहन मोहे मोहनी, भई नेह बढ़वारी - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (65)

मोहन मोहे मोहनी, भई नेह बढ़वारी - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (65)

मोहन मोहे मोहनी, भई नेह बढ़वारी ।
हा राधे हा हा प्रिया, कहत पुकारी पुकारी ॥

- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (65)

मन को मोहित करने वाले श्री कृष्ण को उन परम मोहिनी श्री राधा ने पूरी तरह मोहित कर लिया है, जिससे उनके मध्य प्रेम का अनुराग निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। श्री कृष्ण विरह और प्रेम के वशीभूत होकर "हा राधे! हा हा प्रिया!" पुकारते हुए व्याकुल होकर उन्हें चारों ओर ढूँढ रहे हैं।