उत्तरे हरिदेवस्य दक्षिणे कालियस्य तु - वराहपुराण, मथुरा महात्म (156.18)

उत्तरे हरिदेवस्य दक्षिणे कालियस्य तु - वराहपुराण, मथुरा महात्म (156.18)

उत्तरे हरिदेवस्य दक्षिणे कालियस्य तु ।
अनयोर्देवयोर्मध्ये ये मृतास्तेऽपुनर्भवाः ।।

- वराहपुराण, मथुरा महात्म (156.18)
 
जहां उतर में श्री कृष्ण दक्षिण में कालियनाग का निवास है, इन दोनों देव स्थलों के मध्य प्रान त्यागने से पुनर्जन्म नहीं होता । यह स्थान वृंदावन में कालीदह के समीप स्थित है ।