ध्रुव से प्रहलाद गज ग्राह से अहिल्या देवि
स्योरी और गीध और विभीषन जिन तारे हैं। [1]
पापी अजामिल सूर तुलसी रैदास कहूँ,
नानक मलूक 'ताज' हरि ही के प्यारे हैं॥ [2]
धनी नामदेव दादू सदना कसाई जानि,
गनिका कबीर मीरा सेन उर धारे हैं। [3]
जगत को जीवन जहान बीच नाम सुन्यो
राधा के वल्लभ कृष्ण वल्लभ हमारे हैं॥ [4]
- ताज बेगम
ताज बेगम कहती हैं, 'जिन्होंने ध्रुव, प्रह्लाद, गज-ग्राह, अहिल्या देवी, शबरी, गीधराज जटायु और विभीषण को इस संसार सागर से पार उतारा, वही श्री हरि हमारे हैं।' [1]
स्योरी और गीध और विभीषन जिन तारे हैं। [1]
पापी अजामिल सूर तुलसी रैदास कहूँ,
नानक मलूक 'ताज' हरि ही के प्यारे हैं॥ [2]
धनी नामदेव दादू सदना कसाई जानि,
गनिका कबीर मीरा सेन उर धारे हैं। [3]
जगत को जीवन जहान बीच नाम सुन्यो
राधा के वल्लभ कृष्ण वल्लभ हमारे हैं॥ [4]
- ताज बेगम
ताज बेगम कहती हैं, 'जिन्होंने ध्रुव, प्रह्लाद, गज-ग्राह, अहिल्या देवी, शबरी, गीधराज जटायु और विभीषण को इस संसार सागर से पार उतारा, वही श्री हरि हमारे हैं।' [1]
पापी अजामिल, सूरदास, तुलसीदास, रैदास, गुरु नानक और मलूकदास भी उन्हीं श्री हरि के प्यारे हैं। [2]
धना, नामदेव, दादू, सदन कसाई, गणिका, कबीरदास, मीरा बाई और सेना ने भी उन्हीं श्री हरि को अपने हृदय में बसाया। [3]
श्री ताज बेगम जी कहती हैं कि समस्त संसार का उद्धार करने वाले श्री राधारानी के प्राणप्यारे श्री कृष्ण ही मेरे वल्लभ हैं। [4]

