श्रीराधायाः शिञ्जन्मणिनूपुरपादविन्यासान् ।
सप्रेम तत्र तत्र स्मृत्योदश्रा वसन्ति तद्वने धन्याः ॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.91)
जहां-तहां श्रीराधा की मणिमय नूपुरों की ध्वनिसंयुक्त चरण-धरन को प्रेमपूर्वक स्मरण करते करते अश्रुपूर्ण नेत्रयुक्त भाग्यवान् पुरुष ही श्रीवृन्दावन में वास करते हैं ।
सप्रेम तत्र तत्र स्मृत्योदश्रा वसन्ति तद्वने धन्याः ॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.91)
जहां-तहां श्रीराधा की मणिमय नूपुरों की ध्वनिसंयुक्त चरण-धरन को प्रेमपूर्वक स्मरण करते करते अश्रुपूर्ण नेत्रयुक्त भाग्यवान् पुरुष ही श्रीवृन्दावन में वास करते हैं ।

