लै करुवो कौपीन कामरी - श्री नागरिदेव जू की वाणी (2)

लै करुवो कौपीन कामरी - श्री नागरिदेव जू की वाणी (2)

लै करुवो कौपीन कामरी, कुंजनि कुंजनि कूल विलास ।
तब मिलि हैं मीत मनमुदित, श्रीविहारीविहारिनिदासि खवासि ॥

- श्री नागरिदेव जू, श्री नागरिदेव जू की वाणी (2)

हाथ में जल का पात्र (करुवा), शरीर पर लंगोटी (कौपीन) और ओढ़ने के लिए काली कमली धारण कर अर्थात् समस्त सांसारिक वासनाओं का भली भांति त्याग कर, जब तुम वृन्दावन के कुंजों और यमुना के तटों पर प्रेम से विचरण करोगे, तभी रस-मय युगल श्री बिहारी बिहारिनी जू तुम्हें मिलेंगे। श्री नागरिदेव जी कहते हैं कि ऐसी स्थिति में ही उस दिव्य युगल की अंतरंग सेवा (खवासी) प्राप्त हो सकेगी।